पलायन से खाली हो रहे गाँवों में खेती करने के लिए लौटा युवा, सलाम करें इस हौसले को

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टिहरी: उत्तराखंड में पलायन रोकने के लिए राज्य सरकार जहां कई तरह की योजनाएं बना रही है वहीं कई ऐसे उदाहरण भी हैं जहां लोग अपनी अच्छी-खासी नौकरियां छोड़कर गांव लौट रहे हैं और स्थानीय लोगों को रोज़गार भी दे रहे हैं. टिहरी के विपिन बडोनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़ गांव लौटे और यहां बिपिन ने खुद मशरूम कल्चर की ट्रेनिंग ली और फिर मशरूम का उत्पादन शुरू किया. अब न सिर्फ़ वह अच्छी-खासी कमाई कर रहे हैं बल्कि स्थानीय लोगों को रोज़गार भी दे रहे  हैं.

टिहरी के विपिन बडोनी ने कई समय तक प्राइवेट कंपनी में हैदराबाद,दिल्ली जैसे शहरों में नौकरी की. लेकिन पहाड़ से हो रहे पलायन और बंजर होते खेतों को देख वह नौकरी छोड़कर घर लौट आये. विपिन ने मशरूम उगाने का प्रशिक्षण लिया और मशरूम की खेती शुरू की. अब वो  पूरे जिले में महिलाओं को मशरूम उत्पादन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। बिपिन ने घनसाली में मशरूम स्पॉनिंग लैब हिमवंत बायोटेक नाम से स्थापित की और सालभर में 10 टन जैविक मशरूम का उत्पादन किया। विपिन अब तक विभिन्न महिला समूहों की करीब 100 से अधिक महिलाओं को ट्रेनिंग दे चुके हैं और उन्हे आत्मनिर्भर बना रहे हैं. विपिन की इस पहल से आज क्षेत्र के लोगों में आस जगी है और वह विपिन की इस पहल के साथ चलने को तैयार हैं.

टिहरी का यह युवा उन युवाओं को आइना दिखाने का काम कर रहा है जो संसाधनों का रोना रोकर पहाड़ से पलायन कर रहे हैं. इसके साथ ही नीति निर्माताओं को भी संदेश दे रहे हैं कि योजनाएं काग़ज़ों से ज़मीन पर उतरेंगी तो लोग उन्हें सफल बनाने के लिए तैयार हैं.

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