औद्योगिक विकास मंत्री से मिलकर उद्योगपतियों को मिली नई उम्मीद

औद्योगिक विकास मंत्री से मिलकर उद्योगपतियों को मिली नई उम्मीद

औद्योगिक विकास मंत्री की फौजी अंदाज से उद्योगपतियों में जगी उम्मीद

250 से ज्यादा औद्योगिक इकाइयां देती है 300 करोड़ का राजस्व और एक लाख नौकरियां

राज्य के उद्योग मंत्री गणेश जोशी द्वारा सोमवार को उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में अवस्थित बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में से एक भगवानपुर औद्योगिक आस्थान का स्थलीय निरीक्षण कर औद्योगिक आस्थान भगवानपुर में व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उद्योग मंत्री भगवानपुर औद्योगिक संगठन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में प्रतिभाग करने के लिए आए थे।

भगवानपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष मनोज कर्णावत द्वारा कबीना मंत्री का औपचारिक स्वागत करते हुए उन्हें अवगत कराया 2006 में स्थापित भगवानपुर औद्योगिक संगठन के तहत लगभग ढाई सौ से ज्यादा औद्योगिक इकाइयां कार्यरत हैं. जिनमें 10 बड़े उद्योग, 100 से अधिक मध्यम उद्योग तथा 180 से अधिक छोटे एवं लघु उद्योग सम्मिलित हैं। जिनमें सीमेंट, स्टील, प्रीफैबरीकेटेड स्ट्रक्चर्स, पैकेजिंग, फार्मा, फूड प्रोडक्ट, कॉस्मेटिक एवं इलेक्ट्रॉनिक्स के उद्योग शामिल हैं। भगवानपुर औद्योगिक आस्थान प्रतिवर्ष 300 करोड रुपए का राजस्व जीएसटी के रूप में तथा एक लाख से अधिक रोजगार उत्पादित करता है।
औद्योगिक आस्थान के वाइस प्रेसिडेंट एमपी शुक्ला में भगवानपुर की समस्याओं के बारे में प्रस्तुतीकरण देते हुए अनुरोध किया कि वर्तमान औद्योगिक नीति में भी औद्योगिक नीति 2003 में दी गई छूट तथा रिआयतों को जारी रखा जाए। जिसमें केंद्रीय उत्पाद शुल्क (10 साल के लिए 100% छूट), सीमा शुल्क (5 साल तक 50%) तथा आयकर में छूट (50%) सहित भूमि क्रय किए जाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करने मैं सर्किल रेट मैं छूट दी गई थी। उन्होंने मांग की यूपी की तर्ज पर सीडा का आस्थानो के अंदर विकास शुल्क को को कम किया जाए। उद्योग लगाने के लिए कृषि भूमि क्रय करने पर उत्तराखंड राज्य में यूपी की तुलना में लगभग ढाई सौ गुना ज्यादा कर देना पड़ता है इसके अलावा अनावश्यक औपचारिकताओं की वजह से औद्योगिकरण में भी विलंब होता है।

इस मौके पर भगवानपुर औद्योगिक आस्थान की ओर से चार सूत्रीय सुझाव पत्र भी पेश किया गया।

उद्योग मंत्री द्वारा अपने संबोधन में कहा गया कि माननीय मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के नेतृत्व में संचालित उत्तराखंड की सरकार उत्तराखंड राज्य के औद्योगिक विकास के लिए कटिबद्ध है। इसी का नतीजा है, आपके यहां आज आने से 1 सप्ताह पूर्व ही मैं सचिव उद्योग एवं निदेशक उद्योग के साथ बैठक कर औद्योगीकरण को गति देने संबंधी ओसियां पर दिशा निर्देश पहले ही देख चुका हूं। यूपी की तुलना में यहां बताए गए ज्यादा कर को तर्कसंगत बनाने के लिए, ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों द्वारा क्रय की जा रही भूमि के सर्किल रेट निर्धारित करने के लिए, उद्योगों के मानचित्रो की स्वीकृति, तथा औद्योगिक संस्थानों के विकास की जिम्मेदारी सीडा (SIDA) को दिए जाने के बारे में हमारी सरकार पहले ही काम कर रही है। मैं अधिकारियों को इस संबंधित निर्देश दे चुका हूं। आशा है जल्दी विभागीय प्रस्ताव कैबिनेट में रखा जाएगा। इसके देखते भगवानपुर औद्योगिक क्षेत्र में आस्थापना विकास की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है यह मैं स्वयं लेकर आ रहा हूं। जल्द ही औद्योगिक क्षेत्र में सड़क मार्ग, स्ट्रीट लाइट, सफेद जल निकासी की व्यवस्था जैसे आधारभूत कार्य पर काम किया जाएगा।

इस अवसर पर, भगवानपुर की विधायक ममता राकेश, रूरकी के विधायक प्रदीप बत्रा, निदेशक उद्योग सुधीर नौटियाल, सिडकुल के क्षेत्रीय प्रबंधक जी एस रावत, सीडा के एस के पंत, शरद अग्रवाल, जिला उद्योग निदेशक पल्लवी आदि उपस्थित रहे। भा गया उद्योग मंत्री का फ़ौजी अंदाज भगवानपुर औद्योगिक आस्थान के उद्योग मित्रों से सीधा संवाद स्थापित करने पहुंचे उद्योग मंत्री की सादगी और कम समय में ही कुछ कर दिखाने की फौजी प्रतिबद्धता उद्योग मित्रों को भा गई.

उद्योग मित्रों को अवगत कराया गया की सरकार शादी के औद्योगिक विकास के लिए संवेदनशील है, इसीलिए इस कार्यक्रम से पूर्व ही उद्योग सचिव एवं उद्योग निदेशक को उद्योग से संबंधित समस्याओं पर प्रस्ताव बनाने के लिए निर्देशित किया जा चुका है.

उद्योगों का विकास करने और नए रोजगार सृजन के लिए खेलेंगे 20-20

मीडिया द्वारा सरकार के सीमित बचे हुए कार्यकाल के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में औद्योगिक विकास मंत्री ने कहा कि अगर टेस्ट मैच खेलने का समय नहीं बचा हुआ है तो हम 20-20 के अंदाज में बैटिंग करेंगे.

आईडीएस 2017 को बढ़ाए जाने के लिए केंद्र को लिखा पत्र

उद्योग मंत्री ने कहा कि औद्योगिक विकास स्कीम 2017 के अंतर्गत मिल रहे लाभ हालांकि 2022 तक मिलेंगे, परंतु विगत कोरोना संक्रमण के कारण लगभग डेढ़ साल का समय खुरासन करण से हमारे संघर्ष में चला गया है. इसलिए आई डीएस 2017 के लाभों को 2022 के बाद भी बढ़ाए जाने के लिए हमने अभी से पैरवी शुरू कर दी है. केंद्र सरकार को आवेदन किया जा चुका है. और मैं स्वयं जाकर भी इसकी पैरवी करूंगा।

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